Surya Namaskar कैसे करें, जानिए पूरी जानकारी

सभी जानते है कि सूर्य ऊर्जा का एक बड़ा स्त्रोत है, ऐसे में Surya Namaskar के द्वारा प्राचीन ऋषिमुनि सूर्य की पूजा अर्चना करते थे। अगर कोई भी योग करने की शुरुआत करना चाहता है, तो उसके लिए सूर्य नमस्कार का अभ्यास करना एक बेहतर विकल्प है।

अगर बात करें सूर्य नमस्कार के मतलब कि तो आपको बता दे कि सूर्य को नमन करना अर्थात Sun Salutation होता है। आपको बता दे कि सूर्य नमस्कार करने से आपको 12 योगासनों का एक साथ फायदा मिलता है इसके चलते सूर्य नमस्कार सर्वश्रेष्ठ योगासन कहा जाता है।

लेकिन अक्सर लोग इसे करने में गलती कर देते है। हम अपने पिछले आर्टिकल में आपको जानकारी दे चुके है कि Pranayama कैसे करें ऐसे में हम आपको अपने आर्टिकल में आपको बताने जा रहे है कि Surya Namaskar कैसे करें।

Surya Namaskar कैसे करें, जानिए पूरी जानकारी

Surya Namaskar के बारे में  

आपको बता दे कि सूर्य नमस्कार के 12 आसनों के दो क्रम होते है। जहां पर 12 योगासन सूर्य नमस्कार का एक क्रम पूरा करते हैं। वहीं सूर्य नमस्कार के दूसरे क्रम में 12 योग आसनों को फिर से दोहराया जाता है।

लेकिन दूसरे क्रम में दाहिने पैर के स्थान पर बाएं पैर का प्रयोग किया जाता है। आप सूर्य नमस्कार के उत्तम परिणाम को प्राप्त करने के लिए नियमित अभ्यास की आवश्यकता होती है। आइये जानते है सूर्य नमस्कार के 12 आसन कौन से है।

Surya Namaskar के बारे में
Surya Namaskar के बारे में  

सूर्य नमस्कार के 12 आसन 

  1. प्रणाम आसन 
  2. हस्तउत्तानासन 
  3. हस्तपाद आसन 
  4. अश्व संचालन आसन 
  5. दंडासन 
  6. अष्टांग नमस्कार 
  7. भुजंग आसन 
  8. पर्वतासन 
  9. अश्व संचालन आसन 
  10. पादहस्तासन 
  11. हस्तउत्थान आसन 
  12. ताड़ासन 

प्रणाम आसन

इस आसन को करने के लिए आप अपने मैट के किनारे पर खड़े हो जाएं तथा अपने दोनों पंजों को एक साथ जोड़कर रखें। अब आप अपना पूरा वजन अपने दोनों पैरों पर समान रूप से डालें तथा अपनी छाती को फुलाए और अपने कंधों को ढीले रखें।

अब सांस लेंते हुए अपने दोनों हाथों को बगल से ऊपर उठाएं और अपनी सांस छोड़ते हुए हथेलियों को जोड़ते हुए छाती के सामने प्रणाम मुद्रा में ले आए। 

Surya Namaskar - प्रणाम आसन
Surya Namaskar – प्रणाम आसन

हस्तउत्तानासन 

इस आसन को करने किए लिए सांस लेते हुए अपनों दोनों हाथों को ऊपर उठाकर पीछे की और ले जाएं। ऐसा करते हुए अपने बाइसेप्स को अपने कानों के पास रखें।

इस आसन को करते समय एडियों से लेकर हाथों की उंगलियों तक अपने शरीर के सभी अंगों को ऊपर की तरफ खींचने का प्रयास करें। इस असं को प्रभावी बनाने के लिए अपने कुल्हे को आगे की और धकेलकर यह सुनिश्चित कर लें कि आप अपनी उंगलियों के साथ में ऊपर की तरफ ही जा रहे हों।

Surya Namaskar -हस्तउत्तानासन
Surya Namaskar -हस्तउत्तानासन

हस्तपाद आसन 

सूर्य नमस्कार के इस आसन में आप सांस छोड़ते हुए, रीढ़ की हड्डी को सीधा रखते हुए कमर से आगे की तरफ झुक जाए। अब पूरी तरह सांस छोड़ते हुए अपनों दोनों हाथों को पंजो के समीप जमीन पर रखें।

इस आसन को प्रभावी बनाने के लिए आप अपनी हथेलियों को जमीन तक लाने के लिए घुटनों को मोड़ सकते हैं। इसके बाद आप घुटनों को सीधा करें। ध्यान रखें कि जब तक सूर्य नमस्कार का यह क्रम पूरा न हो जाए अपने हाथों की स्थिति को इसी स्थान पर स्थिर रखें। 

हस्तपाद आसन
Surya Namaskar -हस्तपाद आसन 

अश्व संचालन आसन 

योग के इस आसन में सांस लेते हुए अपने दाहिने पैर को जितना संभव हो सके पीछे की ओर ले जाएं। अब अपने दाहिने घुटने को जमीन पर रखें और दृष्टि को ऊपर की तरफ ले जाएं।

इस आसन को प्रभावी बनाने के लिए यह सुनिश्चित करें कि बायां पैर दोनों हथेलियों की बीच में ही रहे। 

Surya Namaskar -अश्व संचालन आसन
Surya Namaskar -अश्व संचालन आसन 

दंडासन 

इस आसन में आपको सांस लेते हुए अपने बाएं पैर को पीछे कि और ले जाकर अपने पूरे शरीर को सीधी रेखा में रखना है। इस आसन को प्रभावी बनाने के लिए आपको अपने हाथों को जमीन के लंबवत रखना होगा। 

Surya Namaskar -दंडासन
Surya Namaskar -दंडासन 

अष्टांग नमस्कार 

यह आसन करते समय आपको अपने दोनों घुटनों को आराम से  जमीन पर लाकर सांस छोड़ना होगी। अब आपको अपने कूल्हों को पीछे ऊपर की ओर उठाना होगा।

इसके साथ अब आपको शरीर आगे खिसका कर, अपनी छाती और ठुड्डी को जमीन से टच करना होगा। इस आसन को करते समय आप अपने कूल्हों को थोड़ा उठाकर रखें तथा अपने दोनों हाथों, दोनों पैरों, दोनों घुटनों, छाती और ठुड्डी को जमीन से छूता हुआ रखे। 

Surya Namaskar -अष्टांग नमस्कार
Surya Namaskar -अष्टांग नमस्कार 

भुजंग आसन 

इस असं में आप आगे की तरफ सरकते हुए, अपनी छाती को उठाएं। इस समय आपकी कोहनियाँ मुड़ी हुई तथा कंधे कानों से दूर और दृष्टि ऊपर की और होना चाहिए।

इस योग को प्रभावी बनाने के लिए आपकी छाती आगे की तरफ धकेले। सांस छोड़ते हुए नाभि को नीचे की ओर दबाए। इस समय आपके पैरों की उँगलियाँ नीचे की और दबी होना चाहिए। यह क्रिया आपसे जितनी हो उतनी ही करें, अपने शरीर के साथ कोई जबरदस्ती ना करें। 

Surya Namaskar -भुजंग आसन
Surya Namaskar -भुजंग आसन 

पर्वतासन 

इस आसन में सांस छोड़ते हुए अपने कूल्हों और रीढ़ की हड्डी के निचले भाग को ऊपर की ओर उठाएं। अब अपनी छाती को नीचे झुकाकर उल्टे वी के आकार में आ जाएं।

इस योग को प्रभावी बानाने के लिए एडियों को जमीन पर रखें तथा रीढ़ के निचले भाग को ऊपर की ओर उठाने का प्रयास करें। आप इस आसन को करने पर होने वाले खिंचाव को गहराई से अनुभव करें।

Surya Namaskar -पर्वतासन
Surya Namaskar -पर्वतासन 

अश्व संचालन आसन 

सबसे पहले सांस लेते हुए दाहिने पैर को दोनों हाथों के बीच में ले जाएं। अब बाएं घुटने को जमीन पर रखें तथा दृष्टि को ऊपर की तरफ रखें।

इस आसन को प्रभावी बनाने के लिए दाहिने पंजे को दोनों हाथों के बीच में रखकर, दाहिनी पिंडली को जमीन के लंबवत रखें। अब कूल्हों को नीचे की ओर ले जाने का प्रयास करें ताकि खिंचाव को गहराई से अनुभव करें। 

Surya Namaskar -अश्व संचालन आसन
Surya Namaskar -अश्व संचालन आसन 

पादहस्त आसन 

सांस छोड़ते हुए इस आसन में बाएं पैर को आगे की और ले जाएं, हथेलियों को जमीन पर रखें। जरूरत हो तो घुटने मोड़ दे।

इस आसन को प्रभावी बनाने के लिए धीरे से घुटनों को सीधा करने और अपनी नाक से घुटनों को छूने का प्रयास करें। इस समय सांस लेते रहें। 

Surya Namaskar - पादहस्त आसन
Surya Namaskar – पादहस्त आसन 

हस्तउत्थान आसन 

इस आसन को करते समय रीढ़ की हड्डी को धीरे धीरे करके ऊपर लाएं तथा हाथों को ऊपर की और लेजाकर पीछे की ओर ले जाएं। अब कूल्हों को आगे की तरफ धकेलें।

इस आसन को प्रभावी बनाने के लिए आप अपने कान बाजू से सटाकर रखें इस समय खिंचाव ऊपर की और रहे न कि पीछे की तरफ। 

Surya Namaskar -हस्तउत्थान आसन
Surya Namaskar -हस्तउत्थान आसन 

ताड़ासन 

सांस छोड़ते हुए अपने शरीर को पहले सीधा करें। अब हाथों को नीचे की ओर लाएं। आपको इस अवस्था में विश्राम करना है तथा शरीर में हो रही संवेदनाओं के प्रति सजगता लानी होगी। 

Surya Namaskar - ताड़ासन
Surya Namaskar – ताड़ासन 

उम्मीद है आपको हमारा आर्टिकल पसंद आया होगा तथा आप जान गए होंगे की Surya Namaskar कैसे करें।


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